Thursday, October 28, 2010
Wednesday, October 27, 2010
क्यों होती है शादी के पहले सगाई?
Tuesday, October 26, 2010
इंसानी वीर्य सर्वशक्तियों का आधार
महात्मा बुद्ध के अवतरण के पश्चात तंत्र शास्त्र को एक नया आयाम और क्षेत्र मिला। भारतीय तंत्र शास्त्र के मूल तत्व ही आगे चलकर बौद्ध साधना का अंग बने। नोवीं से ग्यारहवीं शताब्दी तक बौद्ध तंत्रों का चीनी और तिब्बती भाषा में अनुवाद हुआ। बौद्ध धर्म की शाखा महायान पुन: तीन शाखाओं- वज्रयान, मंत्रयान एवं सहजयान में बंट गई। महात्मा बुद्ध ने अपने वचनों में पूर्ण पवित्रता एवं ब्रह्मचर्य को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना है। इन्द्रिय भोगों को पूर्णता प्राप्ति में सबसे बड़ा अवरोधक बताया है। इसीलिये असली बौद्ध ग्रथों में ब्रह्मचर्य को साधक के लिये सर्वथा अनिवार्य बताया गया है। महात्मा बुद्ध मानते थे कि-
'मनुष्य शरीर स्थित वीर्य अत्यंत ही अमूल्य पदार्थ है। यह वीर्य ही मनुष्य की समस्त शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्तियों का आधार है। इस संचय के अभाव में साधक को आत्मज्ञान की प्राप्ति कभी भी नहीं हो सकती।'
Saturday, October 16, 2010
माफी माँगने से बनते है बिगड़ते रिश्ते
अब आप यह सोच रहे है की किस तरह से माफी मांगें की बरसों की दोस्ती को टूटने से बचाया जा सके ? हम आपको यंहा बता रहे है कुछ ऐसे टिप्स जिन्हें अपनाकर आप किसी से अपनी गलती के लिए माफी मांग सकते है यक़ीनन आपकी मित्रता वापस आपने दोस्त से हो जायेगी
कार्ड या फुल उपहार में दें
जब भी आपका दोस्त आपसे नाराज हो तो उससे सीधे माफी न मांगकर उन्हें कार्ड या फुल भेजे आपके एस उपहार से उसके चहरे पर एक हल्की मुस्कान आ जायेगी और आपके रिश्ते में पडी खटास दूर हो जायेगी इस तरह आप उसके प्रति आपनी भावनाएं जाहिर कर सकते है
मैसेज भेजे
आप माफी मांगने के लिए मैसेज भी भेज सकते है यह माफी मांगने का दिलचस्प तरीका है गुस्से में हो सकता हे कि आपका दोस्त आपका फोन ही न उठाये लेकिन मैसेज तो वह पड़ ही लेगा इस तरह आप उनके माफी मांग सकते है, कोई गलतफहमी हे तो उसे भी दूर कर सकते है
कोशिश करते रहिए
अगर बार -बार मांग मांगने के बाद ही आपको सफलता नहीं मिल रही है तो भी परेशान होने कि जरुरत नहीं अगर आप कोशिश करते रहेंगे तो एक दिन उन्हें अहसास होगा कि आप सच्चे दिल से माफी माफी मांग रहे है आखिरकार गलती आपणे कि है तो नतीजा भी तो आपको ही भुगतना ही पड़ेगा
कहते है कि समय बड़े-से-बड़े घाव पर मरहम लगा देता है समय के साथ उनका गुस्सा भी धीरे-धीरे शांत हो जायेगा अगर आपको शुरुआती कोशिशों में सफलता न मिल पी हो तो कोई बात नहीं एक सप्ताह बाद कार्ड या फुल भेजकर फिर से कोशिश करें
खुद काल करें
अगर किशी गंभीर बार पर आपका दोस्त आपसे नाराज हो गया हो तो खुद ही पहले काल करें कभी ये न सोंचे कि वही आपको फोन करेगा अगर गलती आपकी है तो पहले खुद कल करें साथ ही अगर आपको लगता हो कि इस बारें में बातचीत करने में झगडा बाद जायेगा तो उनसे मिलाने के बजे पहले काल करें
न अपनाएं रक्षात्मक रुख
कभी रक्षात्मक मत बनिए बात सिर्फ इतनी इतनी -सी है कि आप अपनी गलती पहचान गए है और भूल सुधर करना चाहते है इसलिए आक्रामक होने की जरुरत नहीं है
अपनी और से पहले करने के बाद दुसरे व्यक्ति को सोचने का मौका दीजिये ऐसा नहीं है कि आप एक बार माफी मांगने और सामने वाला व्यकी आपको माफ़ कर देगा उन्हें सोचने दीजिये
दोबारा न करें गलती
इसके बाद अगली बार से कुछ भी करने या कहने से पहले पुरी तरह सावधान रहिए कोशिश करें कि आपसे वही गलती दोबारा न हो क्योंकि लोगो के लिए सबसे मुश्किल काम माफी मांगना ही होता है और वह भी उस गलती के लिए जो आप पहले भी कर चुके है और उसे फिर से दोहरा रहे है
Friday, October 1, 2010
क्या-क्या न करें उपवास में?

अमूमन हर इंसान अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान के नाम पर कभी न कभी उपवास जरूर रखता है। कई लोग नियमित रूप से सप्ताह में एक दिन, कुछ लोग महीने के विशेष दिनों में तो कुछ विशेष त्योहारों पर ही उपवास करते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों को यह नहीं पता है कि उपवास करते कैसे हैं। लोग दिनभर अन्न न खाने या केवल एक समय भोजन करने को उपवास मानते हैं। यह उपवास नहीं बल्कि उसका एक छोटा सा हिस्सा ही है।
कई लोग बरसों तक ऐसे ही उपवास करते रहते हैं और फल न मिलने पर भगवान को कोसते हैं। आइए जानते हैं कि उपवास करने की सही विधि क्या हैं :-
- अगर उपवास कर रहे हैं तो फलाहार के नाम पर दिनभर कुछ खाते न रहें। केवल एक बार ही खाएं, वह भी थोड़ा ही।
- उपवास के दिन सुबह जल्दी जागें, भले ही लंबा पूजन न करें, भगवान को अगरबत्ती और फूल चढ़ाकर प्रणाम जरूर करें।
- दिन में न सोएं। कोशिश करें सारा दिन काम में बीते। मन में भगवान का स्मरण करते रहें।
- किसी की बुराई न करें। मन को नियंत्रण में रखने का प्रयास करें।
- प्रयास करें दिन में थोड़ी देर मौन रहें, मौन यानी मन से भी कुछ न सोचें, न मुंह से बोलें।
- टीवी, सिनेमा या ऐसी कोई चीज जिसे देखने से मन भटकता हो, उससे बचें।
- किसी का झूठा खाने-पीने से बचें।
- किसी मंदिर अवश्य जाएं।
- गाय और कुत्ते को रोटी खिलाएं।
- उस दिन सहवास से भी बचें। खुद पर संयम रखें।
तब आपका उपवास आपको अच्छा फल देने लगेगा। आप किसी भी दिन नियम से ऐसा उपवास करके देखें, आपको पांच से छह उपवास में ही इसका असर दिखाई देने लगेगा।
Thursday, September 30, 2010
बारहवीं के बाद रास्ते और भी हैं...
साइंस स्ट्रीम से बारहवीं करने वाले स्टूडेंट्स अब बायोटेक्नोलॉजी, जेनेटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों में भी स्नातक करने का विकल्प तलाश सकते है। यदि वे टेक्निकल या प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, तो इंजीनियरिंग (बारहवीं पीसीएम के बाद) और मेडिकल (पीसीबी) स्ट्रीम चुन सकते हैं। लेकिन इंजीनियरिंग या मेडिकल लाइन (एमबीबीएस आदि) के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स अनेक कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स, जैसेएआईईईई, आईआईटीजेईई, गेट आदि के टेस्ट देकर इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों, मसलन-मैकेनिकल, एयरोनॉटिकल, कैमिकल, आर्किटेक्टर, बायोमेडिकल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस, आईटी आदि में प्रवेश ले सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, मेडिकल फील्ड की ओर रुख करने वाले स्टूडेंट्स के लिए एमबीबीएस कोर्स के अलावा करियर के तौर पर माइक्रोबायोलॉजी, फिजियोथेरेपी, वेटेरिनरी साइंस, होम्योपैथी, डेंटिस्ट्री आदि क्षेत्रों के विकल्प हैं।
कॉमर्स स्ट्रीम
कॉमर्स स्ट्रीम में कॅरियर बनाने वालों के लिए बीकॉम (पास) और बीकॉम (ऑनर्स) का विकल्प है। इसके जरिए आप बिजनेस अकाउंटिंग, फाइनेंशियल अकाउंटिंग, कॉस्ट अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, बिजनेस लॉ, बिजनेस फाइनेंस, मार्केटिंग, बिजनेस कम्युनिकेशन आदि विषयों में स्नातक कर सकते हैं। कॉमर्स स्ट्रीम चुनने वालों के लिए भविष्य में एमबीए, सीएस, सीए, फाइनेंशियल एनालिस्ट जैसे तमाम कॅरियर ऑप्शंस बांहें फैलाए रहते हैं।
आर्ट्स स्ट्रीम
इस स्ट्रीम में ऐसे कई विषय हैं, जिनकी पढ़ाई करके सरकारी और निजी क्षेत्रों में कॅरियर की ऊंचाई छुई जा सकती है। इस स्ट्रीम में स्नातक के इच्छुक स्टूडेंट्स अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, इतिहास, राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र, अंग्रेजी, हिंदी आदि विषयों का चयन कर सकते हैं।
सदाबहार ऑप्शंस
आर्ट्स विषय पढ़ने वाले अधिकतर स्टूडेंट्स वैसे तो सिविल सर्विस की तैयारी में जुटे रहते हैं, लेकिन इसके अलावा प्रोफेशनल तौर पर एमबीए, जर्नलिम, मार्केट एनालिसिस, टीचिंग, एंथ्रोपोलॉजी, ह्यूमन रिसोर्स, एमएसडब्लू आदि क्षेत्रों में भी काफी करियर ऑप्शंस मौजूद हैं।
प्रोफेशनल कोर्सेज
शार्ट टर्म कोर्स
मौजूदा वक्त में एनिमेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, एस्ट्रोनॉमी, लिंग्विस्टिक, एविएशन आदि के शॉर्ट टर्म कोर्स कर आप अपना कॅरियर संवार सकते हैं। यह शॉर्ट टर्म कोर्स आप कोई और रेगुलर कोर्स या जॉब करते हुए भी कर सकते हैं।
Saturday, August 28, 2010
मीठी और कड़वी होती है आपकी बोली
एक बार चार दोस्त बैठकर गप्पे लड़ा रहे थे। उनमें से एक ने पूछा कि संसार में मीठा क्या है? और तीखा क्या है? सभी ने अपनी राय दी किसी ने कहा गुड़ मीठा है। किसी ने कहा शक्कर। किसी ने कहा रसगुल्लेे। सभी ने मनपसंद चीजों के नाम बताए।उनमें से एक दोस्त ने कहां कि मेरी राय में तो जुबान ही कड़वी और मीठी होती है। सब दोस्तों ने उसका खुब मजाक बनाया कहा ये कैसी अजीब बात है। उस बात को बहुत दिन गुजर गए। एक दिन उस दोस्त ने अपने सारे दोस्तों को खाने पर बुलाया। उसने अपने घर में दावत की पूरी तैयारी कर रखी थी। खाना लाजवाब बना था। अब सभी लोग खाना खाने बैठे तो वह बोला आप लोग तो ऐसे खा रहे हैं जैसे कभी खाना देखा ही नहीं कितनी देर हो गई।ये सुनकर सभी दोस्त नाराज हो गए लेकिन सबसे अलग वह दोस्त एकदम निश्चिंत था। अब सारे दोस्त अपने-अपने घर चले गए। अब वह दोस्त जिसने सब का अपमान किया था। उसने अपने उस दोस्त को फोन लगाकर कहा कि मैं तुम सबसे मिलना चाहता हुं। वो दोस्त उसके स्वभाव को जानता था कि ये जो बोलता है वो साबित करके दिखाता है। इसलिए उसने हां कह दिया। उसने बड़ी मुश्किल से नाराज दोनों दोस्तों को मना लिया। उसने सब को कहा कि आप बताइये मैंने आपको क्या बुरा खाना खिलाया था? क्या मेरी व्यवस्था में कोई कमी थी तो उनमें से एक दोस्त बोला- नहीं, सब कुछ बहुत अच्छा था लेकिन तुम ने ऐसे शब्द को कह दिए की सारा जायका बिगाड़ दिया। उसने कहा ऐसा कैसे हो सकता है? उस दिन आप लोग ही तो मेरा मजाक बना रहा था कि जायका तो खाने में होता है। जुबान में नहीं तो फिर आप लोगों का जायका मेरे बिगाडऩे से कैसे बिगड़ गया। तीनों दोस्त मुस्कुराने लगे। कहने लगे हमे माफ कर दो हमने तुम्हारी बात का मजाक बनाया था लेकिन तुम सही थे। हम सभी मान गए की जुबान ही कड़वी और मीठी होती है।
Monday, July 12, 2010
कैसे बचें मन की पीड़ा से?
जीवन में हम कितनी सारी चीजें सीखते हैं, हमने यह नहीं सीखा कि मन की पीड़ा से कैसे बचें। हम छोटी सी बात का बतंगड़ बनाते हैं। दूसरे के बोले हुए शब्दों को इधर-उधर खींचते हैं। क्या आपकी जिन्दगी का इससे ज्यादा कोई महत्व नहीं है। हम सारा दिन किसी न किसी बात को लेकर शिकायत करते रहते हैं। रास्ते पर जाते हुए गन्दगी की बुराई और शिकायत करेंगे। हमारी तो प्रशंसा भी बुराई से भरी होती है। सारी जिन्दगी शिकायतों के साथ बिता देते हैं। भगवान भी कई बार अपने ही द्वारा बनाई गई इस इंसान नाम की अद्भुत रचना को समझ नहीं पाता है क्योंकि जब वो उसे पृथ्वी पर भेजता है तो वो एक पवित्र आत्मा के रुप में भेजता है। मगर यहां आकर हर एक अपने मन को इतनी शिकायतों व संस्कारो से भर लेता है कि परमात्मा उस पर कृ पा कर उसकी एक शिकायत को हल कर भी दे तो वह नई शिकायत पकड़ कर बैठ जाता है। एक आलसी आदमी था। उसका हमेशा यह रोना था कि बारिश नहीं हुई, इसलिए फसल नहीं हुई। एक दिन उस आदमी पर भगवान को तरस आ गया उन्होने सोचा इस बार बारिश करके बेचारे की सारी समस्या खत्म कर देता हंू। बस फिर क्या था। उन्होंने उस गांव में उस साल खूब पानी बरसाया और सोचा चलो अब तो ये बेचारा आदमी सुखी हो जाएगा। उस साल अच्छी खासी बारिश हुई। खेतों में फसले भी अच्छी तैयार हुई। अब उस आदमी का पहला बहाना खत्म हो गया तो वह कहने लगा, मैं तो थक गया, कितना सारा काम करना पड़ता है। मैं तो दुखी हो गया। इससे तो अच्छा था कि बारिश नही थी। अभी तो फसल है, उसकी निगरानी भी करनी पड़ती है ताकि जानवर आकर उसे खा ना जाएं। तो क्या हुआ बारिश होने से भी शिकायत ना हो ने पर भी शिकायतों का सिलसिला कहां तक चलेगा? इसका कोई अंत नहीं।अब वह आदमी बारिश होने पर भी दुखी हो गया। इसका मतलब यह नहीं की इच्छा करना छोड़ दे। इच्छाएं तो रहती ही हैं, लेकिन हम सब के लिए जरुरी है अपने आप में तृप्त होना क्योंकि कोई भी वस्तु आपको ज्यादा देर तक खुश नहीं रख सकती। असली खुशी आप ही के अंदर है। वह मंदिर व मस्जिद में नहीं मिलेगी, हो सकता है हम अगर शिकायत करना छोड़ दें तो शायद वैसी थोड़ी मुस्कुराहट व खुशी हमारे जीवन में आ जाए जो पल भर के लिए नही हमेशा के लिए हो।

