Thursday, October 28, 2010

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Wednesday, October 27, 2010

क्यों होती है शादी के पहले सगाई?




शादी दो विपरीत लिंगों को न केवल शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक रूप से भी जोड़ती है। इसमें न केवल दो व्यक्ति बल्कि दो समाज मिलते हैं। शायद इसलिए शादी को सामाजिक रूप दिया गया है।
शादी के पवित्र बंधन में बंधने के बाद दो जुदा लोग एक साथ अपनी जिंदगी की शुरुआत करते हैं। जाहिर सी बात है कि बिना जान-पहचान के जिंदगी की गाड़ी पटरी पर चलाना आसान काम नहीं है।
जब दो समाज या समुदाय शादी के पवित्र बंधन के कारण एक होते हैं तो उनमें बहुत से वैचारिक या सैद्धान्तिक मतभेद होते हैं। दोनों के रीति-रिवाज काफी अलग होते हैं। दोनों की धार्मिक मान्यताओं में अंतर होता है।
अगर उन्हें एक-दूसरे को समझने का पर्याप्त समय न मिले तो यह अंतर या मतभेद और गहरे हो सकते हैं। ऐसे में तो शादी की सामाजिक मान्यता पर ही प्रश्रचिन्ह लग सकते हैं।
इस अप्रिय स्थिति से बचने के लिए ही शादी के पहले सगाई करवाने की प्रथा है। सगाई से शादी होने तक का समय एक-दूसरे को समझने तथा उनकी मान्यताओं को स्वीकार करने का होता है।
यही वह समय होता है जब भावी दम्पत्ति आपस में सामन्जस्य स्थापित कर भावी जीवन की शुरुआत के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से ढ़ृढ़ होते हैं।
सगाई के पीछे एक और मान्यता है कि इससे भावी दम्पत्ति एक-दूसरे को जान सकते हैं, आपस में संवाद स्थापित कर भावी जीवन की बेहतरी के लिए प्रेरणा ले सकते हैं। इसलिए शादी से पहले सगाई करवाने की प्रथा है।

Tuesday, October 26, 2010

इंसानी वीर्य सर्वशक्तियों का आधार

तंत्र शास्त्र का वास्तविक और मूल स्वरूप यदि ज्ञात न हो तो इसे जानने में किसी को कठिनाई हो सकती है। इतना ही नहीं तंत्र और उसके फलितार्थों को लेकर दुनिया में अधिकांशत: भ्रांतिपूर्ण धारणाएं भी देखने को मिलती है। जहां तंत्र शास्त्र में कठोर साधना विधानों का प्रतिपादन मिलता है, वहीं वामाचार और पंच मकारों के नाम पर तंत्र में आई उन्मुक्त पाशविकता का प्रोत्साहन एवं समर्थन भी देखा जा सकता है। एक तरफ मिथुन भाव और संभोगरत मुद्राओं के चित्र एवं मूर्तियां तंत्र की घोर भोगलिप्सा को बयान करती हैं, वहीं हठयोग एवं इन्द्रिय भोगों का कठोरतम सर्वस्व त्याग का विधि-विधान तंत्र की चरम पवित्रता एवं तप-त्याग को बयान करते हैं।

महात्मा बुद्ध के अवतरण के पश्चात तंत्र शास्त्र को एक नया आयाम और क्षेत्र मिला। भारतीय तंत्र शास्त्र के मूल तत्व ही आगे चलकर बौद्ध साधना का अंग बने। नोवीं से ग्यारहवीं शताब्दी तक बौद्ध तंत्रों का चीनी और तिब्बती भाषा में अनुवाद हुआ। बौद्ध धर्म की शाखा महायान पुन: तीन शाखाओं- वज्रयान, मंत्रयान एवं सहजयान में बंट गई। महात्मा बुद्ध ने अपने वचनों में पूर्ण पवित्रता एवं ब्रह्मचर्य को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना है। इन्द्रिय भोगों को पूर्णता प्राप्ति में सबसे बड़ा अवरोधक बताया है। इसीलिये असली बौद्ध ग्रथों में ब्रह्मचर्य को साधक के लिये सर्वथा अनिवार्य बताया गया है। महात्मा बुद्ध मानते थे कि-

'मनुष्य शरीर स्थित वीर्य अत्यंत ही अमूल्य पदार्थ है। यह वीर्य ही मनुष्य की समस्त शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्तियों का आधार है। इस संचय के अभाव में साधक को आत्मज्ञान की प्राप्ति कभी भी नहीं हो सकती।'

Saturday, October 16, 2010

माफी माँगने से बनते है बिगड़ते रिश्ते

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किसी बात को लेकर लेकर लोगो में आपसी मतभेद हो जाना आम बात है, लिकिन कभी कभी यह मतभेद उग्र रूप भी ले लेता है अगर आपके और आपके सबसे अच्छे दोस्त के बीच में झगडा हो गया है और आपने अपने दोस्त को कुछ ऐसा कह दिया जिससे उसकी भावनाओं को ठेस पहुंची है तो तुरंत उससे माफी मांग लीजिये



अब आप यह सोच रहे है की किस तरह से माफी मांगें की बरसों की दोस्ती को टूटने से बचाया जा सके ? हम आपको यंहा बता रहे है कुछ ऐसे टिप्स जिन्हें अपनाकर आप किसी से अपनी गलती के लिए माफी मांग सकते है यक़ीनन आपकी मित्रता वापस आपने दोस्त से हो जायेगी

कार्ड या फुल उपहार में दें
जब भी आपका दोस्त आपसे नाराज हो तो उससे सीधे माफी न मांगकर उन्हें कार्ड या फुल भेजे आपके एस उपहार से उसके चहरे पर एक हल्की मुस्कान आ जायेगी और आपके रिश्ते में पडी खटास दूर हो जायेगी इस तरह आप उसके प्रति आपनी भावनाएं जाहिर कर सकते है


मैसेज भेजे
आप माफी मांगने के लिए मैसेज भी भेज सकते है यह माफी मांगने का दिलचस्प तरीका है गुस्से में हो सकता हे कि आपका दोस्त आपका फोन ही न उठाये लेकिन मैसेज तो वह पड़ ही लेगा इस तरह आप उनके माफी मांग सकते है, कोई गलतफहमी हे तो उसे भी दूर कर सकते है

कोशिश करते रहिए
अगर बार -बार मांग मांगने के बाद ही आपको सफलता नहीं मिल रही है तो भी परेशान होने कि जरुरत नहीं अगर आप कोशिश करते रहेंगे तो एक दिन उन्हें अहसास होगा कि आप सच्चे दिल से माफी माफी मांग रहे है आखिरकार गलती आपणे कि है तो नतीजा भी तो आपको ही भुगतना ही पड़ेगा

कहते है कि समय बड़े-से-बड़े घाव पर मरहम लगा देता है समय के साथ उनका गुस्सा भी धीरे-धीरे शांत हो जायेगा अगर आपको शुरुआती कोशिशों में सफलता न मिल पी हो तो कोई बात नहीं एक सप्ताह बाद कार्ड या फुल भेजकर फिर से कोशिश करें

खुद काल करें
अगर किशी गंभीर बार पर आपका दोस्त आपसे नाराज हो गया हो तो खुद ही पहले काल करें कभी ये न सोंचे कि वही आपको फोन करेगा अगर गलती आपकी है तो पहले खुद कल करें साथ ही अगर आपको लगता हो कि इस बारें में बातचीत करने में झगडा बाद जायेगा तो उनसे मिलाने के बजे पहले काल करें

अपनाएं रक्षात्मक रुख
कभी रक्षात्मक मत बनिए बात सिर्फ इतनी इतनी -सी है कि आप अपनी गलती पहचान गए है और भूल सुधर करना चाहते है इसलिए आक्रामक होने की जरुरत नहीं है

अपनी और से पहले करने के बाद दुसरे व्यक्ति को सोचने का मौका दीजिये ऐसा नहीं है कि आप एक बार माफी मांगने और सामने वाला व्यकी आपको माफ़ कर देगा उन्हें सोचने दीजिये

दोबारा न करें गलती
इसके बाद अगली बार से कुछ भी करने या कहने से पहले पुरी तरह सावधान रहिए कोशिश करें कि आपसे वही गलती दोबारा न हो क्योंकि लोगो के लिए सबसे मुश्किल काम माफी मांगना ही होता है और वह भी उस गलती के लिए जो आप पहले भी कर चुके है और उसे फिर से दोहरा रहे है


Friday, October 1, 2010

क्या-क्या न करें उपवास में?



अमूमन हर इंसान अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान के नाम पर कभी न कभी उपवास जरूर रखता है। कई लोग नियमित रूप से सप्ताह में एक दिन, कुछ लोग महीने के विशेष दिनों में तो कुछ विशेष त्योहारों पर ही उपवास करते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों को यह नहीं पता है कि उपवास करते कैसे हैं। लोग दिनभर अन्न न खाने या केवल एक समय भोजन करने को उपवास मानते हैं। यह उपवास नहीं बल्कि उसका एक छोटा सा हिस्सा ही है।
कई लोग बरसों तक ऐसे ही उपवास करते रहते हैं और फल न मिलने पर भगवान को कोसते हैं। आइए जानते हैं कि उपवास करने की सही विधि क्या हैं :-

- अगर उपवास कर रहे हैं तो फलाहार के नाम पर दिनभर कुछ खाते न रहें। केवल एक बार ही खाएं, वह भी थोड़ा ही।

- उपवास के दिन सुबह जल्दी जागें, भले ही लंबा पूजन न करें, भगवान को अगरबत्ती और फूल चढ़ाकर प्रणाम जरूर करें।

- दिन में न सोएं। कोशिश करें सारा दिन काम में बीते। मन में भगवान का स्मरण करते रहें।

- किसी की बुराई न करें। मन को नियंत्रण में रखने का प्रयास करें।
- झूठ न बोलें, दिनभर फालतू बैठकर गपशप भी न करें। गुस्सा न करें।

- प्रयास करें दिन में थोड़ी देर मौन रहें, मौन यानी मन से भी कुछ न सोचें, न मुंह से बोलें।

- टीवी, सिनेमा या ऐसी कोई चीज जिसे देखने से मन भटकता हो, उससे बचें।

- किसी का झूठा खाने-पीने से बचें।

- किसी मंदिर अवश्य जाएं।

- गाय और कुत्ते को रोटी खिलाएं।

- उस दिन सहवास से भी बचें। खुद पर संयम रखें।

तब आपका उपवास आपको अच्छा फल देने लगेगा। आप किसी भी दिन नियम से ऐसा उपवास करके देखें, आपको पांच से छह उपवास में ही इसका असर दिखाई देने लगेगा।