जीवन में हम कितनी सारी चीजें सीखते हैं, हमने यह नहीं सीखा कि मन की पीड़ा से कैसे बचें। हम छोटी सी बात का बतंगड़ बनाते हैं। दूसरे के बोले हुए शब्दों को इधर-उधर खींचते हैं। क्या आपकी जिन्दगी का इससे ज्यादा कोई महत्व नहीं है। हम सारा दिन किसी न किसी बात को लेकर शिकायत करते रहते हैं। रास्ते पर जाते हुए गन्दगी की बुराई और शिकायत करेंगे। हमारी तो प्रशंसा भी बुराई से भरी होती है। सारी जिन्दगी शिकायतों के साथ बिता देते हैं। भगवान भी कई बार अपने ही द्वारा बनाई गई इस इंसान नाम की अद्भुत रचना को समझ नहीं पाता है क्योंकि जब वो उसे पृथ्वी पर भेजता है तो वो एक पवित्र आत्मा के रुप में भेजता है। मगर यहां आकर हर एक अपने मन को इतनी शिकायतों व संस्कारो से भर लेता है कि परमात्मा उस पर कृ पा कर उसकी एक शिकायत को हल कर भी दे तो वह नई शिकायत पकड़ कर बैठ जाता है। एक आलसी आदमी था। उसका हमेशा यह रोना था कि बारिश नहीं हुई, इसलिए फसल नहीं हुई। एक दिन उस आदमी पर भगवान को तरस आ गया उन्होने सोचा इस बार बारिश करके बेचारे की सारी समस्या खत्म कर देता हंू। बस फिर क्या था। उन्होंने उस गांव में उस साल खूब पानी बरसाया और सोचा चलो अब तो ये बेचारा आदमी सुखी हो जाएगा। उस साल अच्छी खासी बारिश हुई। खेतों में फसले भी अच्छी तैयार हुई। अब उस आदमी का पहला बहाना खत्म हो गया तो वह कहने लगा, मैं तो थक गया, कितना सारा काम करना पड़ता है। मैं तो दुखी हो गया। इससे तो अच्छा था कि बारिश नही थी। अभी तो फसल है, उसकी निगरानी भी करनी पड़ती है ताकि जानवर आकर उसे खा ना जाएं। तो क्या हुआ बारिश होने से भी शिकायत ना हो ने पर भी शिकायतों का सिलसिला कहां तक चलेगा? इसका कोई अंत नहीं।अब वह आदमी बारिश होने पर भी दुखी हो गया। इसका मतलब यह नहीं की इच्छा करना छोड़ दे। इच्छाएं तो रहती ही हैं, लेकिन हम सब के लिए जरुरी है अपने आप में तृप्त होना क्योंकि कोई भी वस्तु आपको ज्यादा देर तक खुश नहीं रख सकती। असली खुशी आप ही के अंदर है। वह मंदिर व मस्जिद में नहीं मिलेगी, हो सकता है हम अगर शिकायत करना छोड़ दें तो शायद वैसी थोड़ी मुस्कुराहट व खुशी हमारे जीवन में आ जाए जो पल भर के लिए नही हमेशा के लिए हो।

No comments:
Post a Comment